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भारत सरकार ने मेघालय के विश्व प्रसिद्ध 'लिविंग रूट ब्रिज' (Jingkieng Jri) को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (UNESCO World Heritage List) में शामिल करने के लिए अपना अंतिम प्रस्ताव मजबूती से रखा है। ये पुल न केवल इंजीनियरिंग का एक चमत्कार हैं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच गहरे रिश्ते का प्रतीक भी हैं।
क्यों खास हैं ये ब्रिज?
प्राकृतिक निर्माण: ये पुल पेड़ों की सूखी लकड़ियों से नहीं, बल्कि जीवित रबड़ के पेड़ों (Ficus elastica) की जड़ों को जोड़कर बनाए जाते हैं।
स्थानीय कौशल: मेघालय की खासी और जयंतिया जनजातियाँ सदियों से इन जड़ों को दिशा देकर मजबूत पुलों का रूप देती आ रही हैं।
अतुलनीय मजबूती: समय के साथ ये पुल और भी मजबूत होते जाते हैं और एक बार में 50 से अधिक लोगों का भार सहन कर सकते हैं।
पर्यटन पर असर अगर यूनेस्को इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा देता है, तो मेघालय में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी। इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और इन प्राकृतिक संरचनाओं के संरक्षण में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष मेघालय के ये रूट ब्रिज हमें सिखाते हैं कि बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए भी हम अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं। क्या आपने कभी इन पुलों पर चलने का अनुभव किया है? अपनी यात्रा की यादें हमें कमेंट्स में बताएं!