लंदन में आयोजित हुए G20 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सदस्य देशों ने 'ग्लोबल डिजिटल करेंसी फ्रेमवर्क' को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर और यूरो जैसी पारंपरिक मुद्राओं के साथ-साथ अधिकृत डिजिटल मुद्राओं (CBDC) के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया है।
सम्मेलन के मुख्य बिंदु:
सीमा पार भुगतान: इस समझौते के बाद एक देश से दूसरे देश में पैसा भेजना अब पहले से कहीं अधिक सस्ता और तेज हो जाएगा।
महंगाई पर लगाम: वैश्विक बैंकों का मानना है कि एक एकीकृत डिजिटल सिस्टम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की अस्थिरता को कम किया जा सकेगा।
साइबर सुरक्षा: डिजिटल करेंसी के लिए एक विशेष 'ग्लोबल साइबर टास्क फोर्स' का गठन किया गया है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखेगी।
भारत की भूमिका: भारत ने अपनी 'डिजिटल रुपया' तकनीक का प्रदर्शन किया, जिसकी दुनिया भर के प्रतिनिधियों ने सराहना की।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, जिससे विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अधिक शक्ति मिलेगी।